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सुप्रीम कोर्ट: आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व के 10 किमी दायरे में खनन पर रोक देशभर में लागू

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आसन आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व के 10 किमी दायरे में खनन पर रोक देश के अन्य सामुदायिक या आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व पर भी लागू होगी। हिमाचल प्रदेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति को तथ्य निर्धारित करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट: आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व के 10 किमी दायरे में खनन पर रोक देशभर में लागू
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

निर्देश की तारीख
14 फरवरी 2024
दायरा
10 किलोमीटर
लागू क्षेत्र
सभी सामुदायिक या आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व
संबंधित राज्य
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश
निर्णयकर्ता
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति या MoEF&CC

पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट ने 14 फरवरी 2024 को उत्तराखंड के आसन आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व, जो रामसर स्थल है, के 10 किलोमीटर दायरे में खनन गतिविधियों पर अंतरिम रोक लगाई थी। यह रोक तब तक प्रभावी रहेगी जब तक परियोजना प्रस्तावक वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति या पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति प्राप्त नहीं कर लेता।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि आर्द्रभूमि को रामसर सम्मेलन के तहत रामसर स्थल घोषित किए जाने के कारण उसके महत्व को देखते हुए यह निर्देश जारी किया गया है। इस आदेश का उद्देश्य आर्द्रभूमि के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना है।

वर्तमान स्थिति

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से स्पष्ट किया कि आसन आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व के 10 किलोमीटर दायरे में खनन पर रोक का निर्देश देश के अन्य सामुदायिक या आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व पर भी लागू होगा। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची, जो मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ का हिस्सा थे, ने कहा कि यह निर्देश केवल मध्य प्रदेश या पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व पर लागू होगा।

न्यायालय हिमाचल प्रदेश द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें राज्य ने तर्क दिया था कि उत्तराखंड में लगाई गई 10 किलोमीटर की सीमा उस पर लागू नहीं होनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश ने कहा कि आसन रिजर्व उसके क्षेत्र में नहीं आता है और राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के विपरीत, आरक्षित क्षेत्र के बाहर बफर जोन की कोई आवश्यकता नहीं है।

हिमाचल प्रदेश की याचिका का कारण राज्य उच्च न्यायालय में लंबित एक याचिका थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश पड़ोसी राज्य हैं, इसलिए 14 फरवरी 2024 का निर्देश हिमाचल प्रदेश पर भी लागू होगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस तथ्य पर कोई विवाद नहीं है कि हिमालयी क्षेत्र दोनों पड़ोसी राज्यों से होकर गुजरता है।

मुख्य तिथियाँ और निर्देश
विवरण तिथि/मान
अंतरिम आदेश की तिथि14 फरवरी 2024
खनन पर प्रतिबंध का दायरा10 किलोमीटर
रामसर स्थलआसन आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व
स्रोत के अनुसार, सभी मान सटीक हैं।

प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आसन रिजर्व हिमाचल प्रदेश में स्थित है या नहीं, यह तथ्य का प्रश्न है। न्यायालय ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति या पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को तथ्य निर्धारित करने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व हिमाचल प्रदेश में पाया जाता है, तो 14 फरवरी 2024 का खनन पर प्रतिबंध हिमाचल प्रदेश पर भी लागू होगा। यदि रिजर्व हिमाचल प्रदेश के क्षेत्र में नहीं पाया जाता है, तो खनन की अनुमति देने या न देने का निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा कानून के अनुसार लिया जाएगा।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि निर्देशों का एक ही सेट पूरे हिमालयी क्षेत्र पर लागू होना चाहिए। एकमात्र अपवाद तभी हो सकता है जब कोई विशेषज्ञ समिति यह कहे कि आर्द्रभूमि रिजर्व आपके राज्य में नहीं है। इसका सीधा प्रभाव हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में खनन गतिविधियों पर पड़ सकता है, साथ ही अन्य राज्यों में स्थित आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व के आसपास के खनन कार्यों पर भी।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति यह निर्धारित करती है कि आसन रिजर्व हिमाचल प्रदेश में स्थित है, तो हिमाचल प्रदेश में 10 किलोमीटर के दायरे में खनन पर प्रतिबंध लागू हो सकता है। इससे राज्य में खनन परियोजनाओं को वन्यजीव बोर्ड से अनुमति लेनी पड़ सकती है।

यदि रिजर्व हिमाचल प्रदेश में नहीं पाया जाता है, तो खनन की अनुमति सक्षम प्राधिकारी द्वारा कानून के अनुसार दी जा सकती है, लेकिन न्यायालय की मौखिक टिप्पणी के अनुसार, आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व के लिए 10 किलोमीटर की सीमा देशभर में लागू होने की संभावना है।

हालांकि, अंतिम निर्णय तथ्यों के निर्धारण और विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। यह स्पष्ट नहीं है कि यह निर्देश अन्य राज्यों में पहले से चल रही खनन परियोजनाओं पर कब से प्रभावी होगा, और इसके लिए आगे की सुनवाई की आवश्यकता हो सकती है।

स्रोत: thehindubusinessline.com

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