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संसदीय समिति ने प्रबंध निदेशकों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष करने की सिफारिश की

संसदीय समिति ने प्रबंध निदेशकों और पूर्णकालिक निदेशकों के लिए न्यूनतम आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष करने की सिफारिश की है। इससे युवा पीढ़ी को कंपनी बोर्ड में अवसर मिल सकते हैं।

मुख्य तथ्य

सिफारिश
प्रबंध निदेशकों और पूर्णकालिक निदेशकों के लिए न्यूनतम आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष करने की सिफारिश
समिति
संसदीय समिति
वर्तमान न्यूनतम आयु
21 वर्ष
प्रस्तावित न्यूनतम आयु
18 वर्ष

पृष्ठभूमि

भारत में कंपनी अधिनियम के तहत प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक बनने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है। यह प्रावधान कंपनी के शीर्ष प्रबंधन में अनुभव और परिपक्वता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था।

अब एक संसदीय समिति ने इस आयु सीमा को घटाकर 18 वर्ष करने की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि यह बदलाव युवा उद्यमियों और नई पीढ़ी को कंपनी बोर्ड में अधिक भागीदारी का अवसर देगा।

वर्तमान स्थिति

समिति की सिफारिश के अनुसार, यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो 18 वर्ष की आयु के व्यक्ति भी प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक के पद के लिए पात्र होंगे। फिलहाल यह प्रस्ताव संसदीय समिति की रिपोर्ट में शामिल है और इसे कानूनी रूप देने के लिए आगे की प्रक्रिया अपेक्षित है।

यह सिफारिश ऐसे समय में आई है जब कॉर्पोरेट जगत में युवा पीढ़ी की भूमिका पर चर्चा बढ़ रही है। हालांकि, इस बदलाव से कंपनी प्रशासन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह स्पष्ट नहीं है।

न्यूनतम आयु में प्रस्तावित बदलाव
पद वर्तमान न्यूनतम आयु प्रस्तावित न्यूनतम आयु
प्रबंध निदेशक21 वर्ष18 वर्ष
पूर्णकालिक निदेशक21 वर्ष18 वर्ष
स्रोत: संसदीय समिति की सिफारिश

संभावित प्रभाव

यदि यह सिफारिश लागू होती है, तो युवा उद्यमियों और पारिवारिक व्यवसायों के अगली पीढ़ी के सदस्यों को कम उम्र में ही कंपनी के शीर्ष पदों पर आसीन होने का अवसर मिल सकता है। इससे नए विचारों और डिजिटल दृष्टिकोण को बढ़ावा मिल सकता है।

वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि 18 वर्ष की आयु में प्रबंधकीय जिम्मेदारियों का निर्वहन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कंपनी के हितों की रक्षा और अनुभव की कमी जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जाना आवश्यक है।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि सरकार इस सिफारिश को स्वीकार कर लेती है और कानून में संशोधन करती है, तो आने वाले वर्षों में कंपनी बोर्ड में युवा चेहरों की संख्या बढ़ सकती है। यह बदलाव स्टार्टअप और पारिवारिक व्यवसायों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हो सकता है।

हालांकि, यह भी संभावना है कि इस प्रस्ताव को संसद में विरोध का सामना करना पड़े, क्योंकि कुछ सदस्य कम उम्र में निदेशक बनने की क्षमता पर सवाल उठा सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो इस पर आगे विचार-विमर्श की आवश्यकता होगी।

फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि यह सिफारिश कब तक कानून का रूप ले पाएगी। इस पर अंतिम निर्णय सरकार और संसद की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

स्रोत: indiatimes.com

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