मुख्य तथ्य
- अर्हक तिथि
- 1 अक्टूबर 2026
- घर-घर सर्वेक्षण
- 16 अगस्त से 14 सितंबर 2026
- मसौदा सूची प्रकाशन
- 20 सितंबर 2026
- दावे और आपत्तियाँ
- 20 सितंबर से 20 अक्टूबर 2026
- अंतिम सूची प्रकाशन
- 22 नवंबर 2026
पृष्ठभूमि
चुनाव आयोग ने नागालैंड में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) का आदेश दिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस अभ्यास के लिए 1 अक्टूबर 2026 को अर्हक तिथि निर्धारित की गई है।
प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी पात्र नागरिक सूची से बाहर न रहे और कोई भी अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
वर्तमान स्थिति
तैयारी चरण 5 से 14 अगस्त तक चलेगा, जिसमें राजनीतिक दलों के साथ बैठकें, सहायता केंद्र स्थापित करना, बूथ स्तर अधिकारियों (BLO) का प्रशिक्षण और प्रपत्रों की छपाई शामिल है।
बूथ स्तर अधिकारी 16 अगस्त से 14 सितंबर तक घर-घर जाकर मौजूदा मतदाताओं के पूर्व-मुद्रित विवरण वाले प्रपत्र वितरित करेंगे। दूसरे दौरे में वे भरे हुए प्रपत्र एकत्र करेंगे और एक प्रति की रसीद देंगे।
मसौदा मतदाता सूची 20 सितंबर को प्रकाशित होगी, जिसमें केवल उन्हीं मतदाताओं के नाम शामिल होंगे जिन्होंने प्रपत्र जमा किए हैं। दावे और आपत्तियों की अवधि 20 सितंबर से 20 अक्टूबर तक रहेगी, और अंतिम सूची 22 नवंबर को प्रकाशित होगी।
| चरण | तिथि |
|---|---|
| तैयारी चरण | 5-14 अगस्त 2026 |
| घर-घर सर्वेक्षण | 16 अगस्त - 14 सितंबर 2026 |
| मसौदा सूची प्रकाशन | 20 सितंबर 2026 |
| दावे और आपत्तियाँ | 20 सितंबर - 20 अक्टूबर 2026 |
| नोटिस चरण | 20 सितंबर - 18 नवंबर 2026 |
| अंतिम सूची प्रकाशन | 22 नवंबर 2026 |
प्रभाव
इस अभ्यास से नागालैंड के सभी मतदाता प्रभावित होंगे, क्योंकि जो लोग निर्धारित समय में प्रपत्र जमा नहीं करेंगे, उनके नाम मसौदा सूची में शामिल नहीं होंगे। ऐसे मतदाता दावे और आपत्तियों की अवधि में फॉर्म 6 जमा कर सकते हैं।
ERO को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी मतदान केंद्र 1,200 से अधिक मतदाताओं वाला न हो, और मतदान क्षेत्रों का परिसीमन इस प्रकार किया जाए कि कोई ओवरलैप न हो। संदिग्ध विदेशी नागरिकों के मामले सक्षम प्राधिकारी को भेजे जाएंगे।
भविष्य की संभावनाएँ
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि सभी पात्र मतदाता समय पर प्रपत्र जमा कर देते हैं, तो अंतिम मतदाता सूची त्रुटिहीन हो सकती है। हालांकि, यदि कई मतदाता प्रपत्र जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे सूची में देरी या विवाद हो सकता है।
यदि संदिग्ध विदेशी नागरिकों के मामले सक्षम प्राधिकारी को भेजे जाते हैं, तो उनकी जाँच में समय लग सकता है, जिससे अंतिम सूची के प्रकाशन पर असर पड़ सकता है। फिर भी, चुनाव आयोग ने समय-सारिणी का पालन करने का निर्देश दिया है।
स्रोत: morungexpress.com



