मुख्य तथ्य
- नया स्कोरिंग सिस्टम
- 15x3 (तीन गेम, प्रत्येक 15 अंक)
- वर्तमान सिस्टम
- 21x3 (तीन गेम, प्रत्येक 21 अंक)
- लागू होने का समय
- अगले साल
- बीडब्ल्यूएफ का तर्क
- खिलाड़ियों के कार्यभार को प्रबंधित करना
- गोपीचंद का ऑल इंग्लैंड खिताब
- 2001, 15-पॉइंट प्रारूप में
- पिछला प्रयोग
- 7x5 स्कोरिंग, एक साल में छोड़ा गया
पृष्ठभूमि
भारतीय बैडमिंटन कोच पुल्लेला गोपीचंद ने बैडमिंटन के नए स्कोरिंग सिस्टम पर चिंता व्यक्त की है। बैडमिंटन विश्व महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) ने अगले साल से मौजूदा 21x3 प्रारूप (तीन गेम, प्रत्येक 21 अंक) की जगह 15x3 प्रणाली (तीन गेम, प्रत्येक 15 अंक) लागू करने को मंजूरी दी है। बीडब्ल्यूएफ का कहना है कि छोटा प्रारूप व्यस्त कैलेंडर में खिलाड़ियों के कार्यभार को प्रबंधित करने में मदद करेगा।
गोपीचंद ने अपने खेल करियर के दौरान स्कोरिंग में हुए बदलावों को याद किया। उन्होंने 2001 में पारंपरिक 15-पॉइंट प्रारूप में ऑल इंग्लैंड खिताब जीता था, जिसके कुछ महीनों बाद बैडमिंटन ने 7x5 स्कोरिंग प्रणाली अपना ली थी। यह प्रयोग एक साल के भीतर छोड़ दिया गया, और खेल पुरुषों के लिए 15 अंक और महिलाओं के लिए 11 अंक वाले पारंपरिक प्रारूप में लौट आया।
वर्तमान स्थिति
विश्व चैंपियनशिप से पहले एक बातचीत में पीटीआई के सवाल के जवाब में गोपीचंद ने कहा, "जब मैंने ऑल इंग्लैंड जीता, उसके कुछ महीने बाद उन्होंने 15 से 7 अंक पर स्विच किया। मुझे समय लगा क्योंकि मैं उन खिलाड़ियों में से था जो स्ट्रोक प्लेयर थे। मैं समायोजित होने के लिए समय चाहता था। मुझे वापस आने में एक साल लग गया।"
उन्होंने कहा, "और जब तक मैं कुछ हद तक व्यवस्थित हो रहा था, वे हमें लंबे प्रारूप में वापस ले आए और यह एक घातक झटका था। क्योंकि आप प्रशिक्षण लेते हैं, फिर प्रशिक्षण छोड़ देते हैं, और आपकी सहनशक्ति गिर जाती है। फिर वापस जाकर 15 अंक खेलना असंभव था। ये निश्चित रूप से बड़ा प्रभाव डालते हैं। कुछ खिलाड़ी खत्म हो जाएंगे, कुछ खिलाड़ियों को फायदा हो सकता है।"
| प्रारूप | विवरण |
|---|---|
| 15x3 | नया प्रस्तावित प्रारूप |
| 21x3 | वर्तमान प्रारूप |
| 7x5 | पिछला प्रयोग, जिसे छोड़ दिया गया |
प्रभाव
गोपीचंद ने 15x3 प्रणाली की तुलना करते हुए कहा कि छोटा प्रारूप गति, शक्ति और मानसिक मजबूती पर अधिक जोर देगा, विशेष रूप से खेल के अंतिम चरणों में। उन्होंने कहा, "आपके अंक हासिल करना महत्वपूर्ण होगा, लेकिन आपका अंक नहीं देना और भी महत्वपूर्ण होगा। गति, शक्ति और फोकस शीर्ष स्तर के होने चाहिए। मन का खेल कहीं अधिक होगा।"
राष्ट्रीय कोच के अनुसार, डबल्स खिलाड़ियों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना है, क्योंकि छोटे गेम मुकाबले के हर चरण को और अधिक महत्वपूर्ण बना देंगे।
भविष्य का परिदृश्य
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि नई स्कोरिंग प्रणाली लागू होती है, तो यह खिलाड़ियों के करियर पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। गोपीचंद के अनुभव के आधार पर, जो खिलाड़ी स्ट्रोक प्ले पर निर्भर हैं, उन्हें समायोजित होने में समय लग सकता है, और कुछ खिलाड़ी इस बदलाव से बाहर हो सकते हैं।
हालांकि, कुछ खिलाड़ी इस नए प्रारूप से लाभान्वित हो सकते हैं, खासकर वे जो गति और शक्ति पर निर्भर हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि यह बदलाव कितना सफल होगा, लेकिन यदि अतीत के अनुभवों को देखें, तो इस तरह के बदलाव खिलाड़ियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।
स्रोत: dailypioneer.com



