मुख्य तथ्य
- मुख्य मांग
- जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा पूरा करे केंद्र सरकार
- नेता
- फारूक अब्दुल्ला (जेकेएनसी अध्यक्ष), सज्जाद शाहीन (एनसी विधायक), महबूबा मुफ्ती (पीडीपी प्रमुख)
- घटना
- अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ पर विरोध प्रदर्शन
- स्थान
- नई दिल्ली और श्रीनगर
- तारीख
- 5 अगस्त 2026
पृष्ठभूमि
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ पर नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने राज्य के दर्जे की बहाली की मांग तेज कर दी है। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पूर्ववर्ती राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नामक दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया था।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह संसद और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्य का दर्जा बहाल करने का जो वादा किया गया था, उसे पूरा करे। पार्टी ने इसे अपनी प्रमुख मांग बनाया हुआ है।
वर्तमान स्थिति
मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने केंद्रीय नेताओं से जम्मू-कश्मीर के लिए बताई गई रोडमैप को लागू करने की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने कहा, 'सरकार को अपना वादा पूरा करना चाहिए; उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों और देश से वादा किया है... उन्हें वादा पूरा करना चाहिए...'
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक सज्जाद शाहीन ने भारतीय जनता पार्टी पर अनुच्छेद 370 को लेकर निशाना साधा और कहा कि संवैधानिक बदलाव से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया। इस राज्य को, जिसे देश का ताज कहा जाता है, अपग्रेड करके दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया।'
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को श्रीनगर में मोमबत्ती जलाकर विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि भाजपा नीत सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा 'लूटा' है। उन्होंने अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली की मांग की।
| नेता | पार्टी | मांग | स्थान |
|---|---|---|---|
| फारूक अब्दुल्ला | जेकेएनसी | राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा पूरा करे | नई दिल्ली |
| सज्जाद शाहीन | एनसी | राज्य का दर्जा बहाल करे सरकार | नई दिल्ली |
| महबूबा मुफ्ती | पीडीपी | अनुच्छेद 370 और 35ए बहाल करे | श्रीनगर |
प्रभाव
इन मांगों का सीधा असर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक भविष्य पर पड़ सकता है। राज्य के दर्जे की बहाली से केंद्र शासित प्रदेश की तुलना में अधिक अधिकार और विधायी शक्तियां मिल सकती हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन और नीति निर्माण में बदलाव आ सकता है।
अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली की मांग का असर नागरिकता, संपत्ति के अधिकार और स्थायी निवास से जुड़े कानूनों पर पड़ सकता है। हालांकि, इन मांगों पर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि केंद्र सरकार राज्य के दर्जे की बहाली का वादा पूरा करती है, तो जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिरता बढ़ सकती है और विपक्षी दलों का दबाव कम हो सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगी या नहीं।
यदि सरकार वादे को पूरा नहीं करती है, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी जैसे दलों के विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं, जिससे क्षेत्र में राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों का फैसला भी भविष्य की दिशा तय कर सकता है।
स्रोत: chinanationalnews.com



