मुख्य तथ्य
- वक्ता
- बिशप अथानासियस श्नाइडर, अस्ताना के सहायक बिशप
- स्थान
- लिमरिक, आयरलैंड (इंस्टीट्यूट ऑफ क्राइस्ट द किंग सॉवरेन प्रीस्ट)
- मुख्य वक्तव्य
- धर्म के लिए लिटर्जी में हस्तक्षेप से बड़ा खतरा कुछ नहीं
- संदर्भ
- पोप फ्रांसिस का ट्रैडिशनिस कस्टोड्स और पोप लियो XIV के अधीन TLM का दमन
- स्रोत
- द कैथोलिक हेराल्ड (रिपोर्ट)
पृष्ठभूमि
कजाकिस्तान के अस्ताना के सहायक बिशप अथानासियस श्नाइडर ने हाल ही में आयरलैंड के लिमरिक में इंस्टीट्यूट ऑफ क्राइस्ट द किंग सॉवरेन प्रीस्ट की यात्रा के दौरान एक उपदेश दिया। इस उपदेश में उन्होंने कैथोलिक चर्च की पवित्र परंपरा, विशेषकर पारंपरिक लिटर्जी को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
बिशप श्नाइडर ने कहा कि कैथोलिक चर्च का स्थायी सिद्धांत है कि उसे अपनी परंपरा के प्रति 'सैद्धांतिक और धार्मिक' दोनों रूप से वफादार रहना चाहिए। उन्होंने कहा, 'सच्ची धर्मपरायणता किसी अन्य नियम को स्वीकार नहीं करती, सिवाय इसके कि जो चीजें हमारे पूर्वजों से विश्वासपूर्वक प्राप्त हुई हैं, वही हमारे बच्चों को विश्वासपूर्वक सौंपी जाएं।'
उन्होंने आगे कहा कि यह हमारा कर्तव्य है कि हम धर्म को जहां चाहें वहां न ले जाएं, बल्कि धर्म का अनुसरण करें जहां वह ले जाता है। ईसाई विनम्रता का मार्ग यह है कि हम अपने स्वयं के विश्वासों या प्रथाओं को न सौंपें, बल्कि उन्हें संरक्षित रखें जो हमें पहले वालों से प्राप्त हुई हैं।
वर्तमान स्थिति
बिशप श्नाइडर ने स्पष्ट रूप से चल रहे 'लिटर्जी युद्ध' पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 'सार्वजनिक पूजा स्वाभाविक रूप से पारंपरिक है'। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसमें लिटर्जी को उसी रूप में प्रार्थना करना शामिल है जैसा कि 'दैवीय अधिकार द्वारा पहले से स्थापित मानदंडों और पूर्वजों द्वारा सौंपे गए' अनुसार है।
उन्होंने लिटर्जिस्ट डोम प्रॉस्पर गुएरांगर को उद्धृत किया, जिन्होंने कहा था कि 'हर विधर्मी या सांप्रदायिक जो एक नया सिद्धांत पेश करना चाहता है, उसे अनिवार्य रूप से पारंपरिक लिटर्जी का सामना करना पड़ता है, क्योंकि लिटर्जी परंपरा है, और सबसे मजबूत और सबसे अच्छी परंपरा है।'
बिशप ने उन लोगों पर आपत्ति जताई जो दावा करते हैं कि पारंपरिक लैटिन मास (TLM) का पालन वास्तव में 'सतही' गंध और घंटियों की पसंद है। उन्होंने कहा कि जो लोग 'चिल्लाते हैं कि चर्च कोई संग्रहालय नहीं है और वास्तव में धर्मपरायण व्यक्ति इन आकस्मिकताओं के प्रति उदासीन है, वे केवल सुंदर अभिव्यक्ति द्वारा निभाई गई महान भूमिका के प्रति अपने अंधेपन को दिखाते हैं।'
प्रभाव
बिशप श्नाइडर ने पोप फ्रांसिस के ट्रैडिशनिस कस्टोड्स और पोप लियो XIV के अधीन जारी TLM के दमन पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 'इतिहास ने एक हजार बार साबित किया है कि धर्म के लिए, असंतोष, अनिश्चितता, विभाजन और धर्मत्याग का कारण बनने वाली चीज़ से ज्यादा खतरनाक कुछ नहीं है, लिटर्जी में हस्तक्षेप और परिणामस्वरूप धार्मिक संवेदनशीलता के साथ छेड़छाड़।'
उन्होंने कहा कि 'पारंपरिक लिटर्जी के बहुमूल्य खजाने को संरक्षित करना डिपॉजिटम फिदेई के संरक्षण का हिस्सा है'। उन्होंने आगे कहा कि चर्च ने सदियों से यह सुनिश्चित किया है कि 'प्राचीनता को बनाए रखा गया, नवीनता को अस्वीकार कर दिया गया – यह प्रेरितिक नियम है।'
श्नाइडर ने पहले ट्रैडिशनिस कस्टोड्स की निंदा करते हुए इसे 'विश्वासियों के एक हिस्से का उत्पीड़न और चर्च की लिटर्जी की पूरी परंपरा की अस्वीकृति' बताया था। लिमरिक में उन्होंने घोषणा की कि 'लिटर्जी अपने सबसे शक्तिशाली और गंभीर रूप में परंपरा है। केवल कैथोलिक चर्च ही कह सकता है कि 'मैंने तुम्हें वही सौंपा जो मुझे प्रभु से मिला था।'
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
बिशप श्नाइडर के बयान से संकेत मिलता है कि पारंपरिक लिटर्जी के समर्थकों और चर्च के वर्तमान नेतृत्व के बीच तनाव जारी रह सकता है। यदि पोप लियो XIV के अधीन TLM पर प्रतिबंध जारी रहता है, तो इससे विश्वासियों के एक वर्ग में असंतोष और विभाजन बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, यदि चर्च नेतृत्व पारंपरिक लिटर्जी के प्रति अधिक सहिष्णु रुख अपनाता है, तो यह तनाव कम हो सकता है। हालांकि, बिशप श्नाइडर की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि वे इस मुद्दे पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं, और यह संभावना है कि यह बहस आगे भी जारी रहेगी।
फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि पोप लियो XIV इस मामले में कोई नई नीति अपनाएंगे या नहीं। यदि वे ट्रैडिशनिस कस्टोड्स की तर्ज पर सख्ती बरतते हैं, तो पारंपरिक लिटर्जी के समर्थकों की ओर से और विरोध हो सकता है। यदि वे कुछ रियायतें देते हैं, तो संभवतः विवाद कम हो सकता है।
स्रोत: freerepublic.com



