प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक सुभाषित साझा किया। इसमें उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा दी।
पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक साझा करते हुए लिखा, “त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि दैवे धैर्यात्कदाचित्स्थितिमाप्नुयात्सः। याते समुद्रेऽपि च पोतभङ्गे सांयात्रिको वाञ्छति कर्म एव।।”
इसका हिंदी अर्थ है कि भाग्य के प्रतिकूल होने पर भी मनुष्य को धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। धैर्य के बल पर वह खोई हुई अनुकूल स्थिति को पुनः प्राप्त कर सकता है। जिस प्रकार समुद्र में जहाज टूट जाने पर भी एक कुशल नाविक जीवित रहने और तैरने के प्रयास की इच्छा रखता है और हिम्मत नहीं हारता।
इससे पहले 29 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सुभाषित साझा करते हुए गुरु के छह स्वरूपों का उल्लेख किया था। 28 जुलाई को उन्होंने प्रकृति संरक्षण और धर्म के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन पर संदेश दिया था।
स्रोत: डीडी न्यूज़, प्रसार भारती



