मुख्य तथ्य
- खिलाड़ी
- जेम्स 'जिमी' रेनॉल्ड्स (पंबुला)
- प्रतियोगिता
- ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल
- पदक
- स्वर्ण
- साथी
- डेमियन डेलगाडो
- प्रतिद्वंद्वी
- न्यूजीलैंड के कर्ट स्मिथ और मार्क नोबल
- स्कोर
- 8-1, 7-2
पृष्ठभूमि
पंबुला के लॉन बॉल्स खिलाड़ी जेम्स 'जिमी' रेनॉल्ड्स ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर अपने करियर का सबसे बड़ा अधूरा काम पूरा कर लिया। यह उनके लिए 24 साल बाद राष्ट्रमंडल खेलों में पदक था, इससे पहले उन्होंने मैनचेस्टर 2002 में कांस्य पदक जीता था और ग्लासगो 2014 में भी हिस्सा लिया था।
रेनॉल्ड्स का जन्म गंभीर स्कोलियोसिस और कई शारीरिक विकलांगताओं के साथ हुआ था। पांच से दस साल की उम्र के बीच उनकी साल में दो से तीन सर्जरी होती थीं, जिसके बाद डॉक्टरों ने पूरी रीढ़ की हड्डी का फ्यूजन किया। बचपन में उन्हें खेल खेलने की अनुमति नहीं थी, लेकिन छठी कक्षा में उन्हें खेलने की इजाजत मिल गई।
रेनॉल्ड्स को शुरू में बॉल्स खेलना पसंद नहीं था, लेकिन उनके शिक्षक पैडी 'मिस्टर मैका' मैकएल्पिन ने उन्हें इसे आजमाने के लिए प्रेरित किया। यही वह फैसला था जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।
वर्तमान स्थिति
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में रेनॉल्ड्स और उनके साथी डेमियन डेलगाडो ने न्यूजीलैंड के कर्ट स्मिथ और मार्क नोबल को 8-1, 7-2 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह जीत रेनॉल्ड्स के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि इसके साथ ही उन्होंने सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पैरा खिताब अपने नाम कर लिए हैं।
रेनॉल्ड्स ने कहा, 'यह एक सपने के सच होने जैसा है, लेकिन मेरे लिए यह कई सालों की मेहनत का नतीजा है। जब मैं रिटायरमेंट से वापस आया था, तब मैंने वह बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब नहीं जीता था। मैंने 2002 में कुछ विश्व खिताब जीते थे, लेकिन उस समय की बात अलग थी। अब मेरे पास हर अंतरराष्ट्रीय पैरा खिताब है, यही सबसे बड़ा सपना है।'
रेनॉल्ड्स और डेलगाडो की जोड़ी लगभग एक दशक पहले बनी थी, जब डेलगाडो को हार का सामना करना पड़ा था। रेनॉल्ड्स ने उस समय डेलगाडो की क्षमता को पहचाना और कहा था कि वह कुछ बड़ा कर सकते हैं।
| वर्ष | स्थान | पदक |
|---|---|---|
| 2002 | मैनचेस्टर | कांस्य |
| 2014 | ग्लासगो | भाग लिया |
| 2026 | ग्लासगो | स्वर्ण |
प्रभाव
इस जीत के साथ रेनॉल्ड्स ने पैरा बॉल्स के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है। उन्होंने हमेशा पैरा बॉल्स को बढ़ावा देने की कोशिश की है और अब वे अगली पीढ़ी के पैरा एथलीटों को प्रेरित करना चाहते हैं।
रेनॉल्ड्स ने कहा, 'मैं हमेशा से वह व्यक्ति रहा हूं जो पैरा बॉल्स पर रोशनी डालता है और दिखाता है कि आप कुछ भी कर सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि और अधिक समूह विकलांग लोगों को नए अवसर देने के लिए आगे आएंगे, ताकि वे भी नई चीजें आजमा सकें और आगे बढ़ सकें।'
यह जीत न केवल रेनॉल्ड्स के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह उन सभी विकलांग लोगों के लिए प्रेरणा है जो खेलों में करियर बनाना चाहते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
रेनॉल्ड्स ने अपने करियर के सभी प्रमुख खिताब जीत लिए हैं, लेकिन उनका ध्यान अब अगली पीढ़ी को प्रेरित करने पर है। यदि वे इसी तरह प्रेरित करते रहे, तो पैरा बॉल्स में और अधिक युवा खिलाड़ी आ सकते हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि रेनॉल्ड्स भविष्य में प्रतिस्पर्धा जारी रखेंगे या नहीं। यदि वे संन्यास लेते हैं, तो वे कोचिंग या मेंटरशिप में शामिल हो सकते हैं, लेकिन इसकी कोई पुष्टि नहीं है।
आने वाले समय में, पैरा बॉल्स के प्रति जागरूकता बढ़ने की संभावना है, खासकर रेनॉल्ड्स की इस उपलब्धि के बाद। यदि अधिक संसाधन और अवसर मिलें, तो यह खेल और लोकप्रिय हो सकता है।
स्रोत: batemansbaypost.com.au



