मुख्य तथ्य
- नियामक
- FSSAI
- कार्रवाई
- बिक्री पर प्रतिबंध
- आधार
- '100 प्रतिशत' के भ्रामक दावे
- प्रभावित उत्पाद
- शहद, सेब का सिरका, वर्जिन नारियल तेल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी, नारियल का दूध
- कंपनी का रुख
- लेबल बदल रहे हैं, कानूनी सलाह ले रहे हैं
- शेयर भाव
- 408.25 रुपये (बीएसई)
पृष्ठभूमि
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डाबर इंडिया के कुछ खाद्य उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिन पर '100 प्रतिशत' होने का दावा किया गया था। नियामक का कहना है कि ये दावे भ्रामक हैं, क्योंकि इन्हें सत्यापित नहीं किया जा सकता।
यह मुद्दा उत्पादों की गुणवत्ता या सुरक्षा से जुड़ा नहीं है, बल्कि लेबलिंग और विज्ञापन के दावों से संबंधित है। FSSAI ने स्पष्ट किया है कि उत्पाद असुरक्षित या घटिया पाए जाने के कारण यह कार्रवाई नहीं की गई है।
वर्तमान स्थिति
डाबर इंडिया ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि वह अपने उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्ध है और उसने कभी कोई भ्रामक दावा नहीं किया। कंपनी ने कहा कि FSSAI के पत्र में जिन उत्पादों का जिक्र है, उनके लेबल और विज्ञापनों को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कंपनी के अनुसार, अधिकांश उत्पादों के लेबल, विज्ञापन और वेबसाइट सामग्री को '100 प्रतिशत' दावे के बिना नए स्वरूप में बदला जा चुका है या बदला जा रहा है। साथ ही, कंपनी भविष्य की कार्रवाई के लिए कानूनी सलाह भी ले रही है।
FSSAI ने सोमवार को कहा था कि डाबर की वेबसाइट पर बेचे जा रहे कुछ खाद्य उत्पादों पर '100 प्रतिशत' के भ्रामक दावे पाए गए हैं। इनमें शहद, सेब का सिरका, वर्जिन नारियल तेल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी और नारियल का दूध शामिल हैं।
| कंपनी | कार्रवाई |
|---|---|
| डाबर इंडिया | बिक्री पर प्रतिबंध |
| मास्टरचाउ | नोटिस |
| लोटे इंडिया | नोटिस |
| कुबेरा फूड्स | नोटिस |
| डिया फूड्स | नोटिस |
| स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज | जुर्माना |
| मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशियलिटीज | जुर्माना |
प्रभाव
इस घटनाक्रम का असर डाबर इंडिया के शेयर बाजार पर देखने को मिला। मंगलवार को बीएसई पर कंपनी का शेयर भाव पिछले दिन के बंद भाव की तुलना में गिरकर 408.25 रुपये पर बंद हुआ।
डाबर के अलावा, FSSAI ने हाल के दिनों में मास्टरचाउ, लोटे इंडिया, कुबेरा फूड्स और डिया फूड्स जैसे अन्य कंपनियों को भी '100 प्रतिशत' दावों के उल्लंघन के लिए नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने जून में स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज और मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशियलिटीज पर '100 प्रतिशत' दावे वाले भ्रामक विज्ञापनों के लिए जुर्माना लगाया था।
आगे की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
डाबर इंडिया ने कहा है कि वह नियामक के साथ बातचीत कर रही है और कानूनी सलाह ले रही है। यदि कंपनी नए लेबल और विज्ञापनों के साथ नियामक की आपत्तियों का समाधान कर लेती है, तो प्रतिबंध हट सकता है।
हालांकि, यदि नियामक और कंपनी के बीच सहमति नहीं बनती है, तो मामला अदालत तक जा सकता है। ऐसे में प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रह सकता है, जिससे कंपनी की बिक्री और ब्रांड छवि पर असर पड़ सकता है।
अन्य कंपनियों पर भी इसी तरह की कार्रवाई से संकेत मिलता है कि नियामक '100 प्रतिशत' जैसे निरपेक्ष दावों पर सख्ती बरत रहा है। यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो खाद्य कंपनियों को अपने विज्ञापनों और लेबलों में ऐसे दावों से बचना होगा।
स्रोत: thehindubusinessline.com



