पठानकोट स्थित उपभोक्ता आयोग ने राजधानी एक्सप्रेस की आरक्षित थर्ड एसी कोच से महिला यात्री का हैंडबैग चोरी होने के मामले में उत्तर रेलवे को सेवा में कमी का दोषी पाया है। आयोग ने रेलवे को 70,000 रुपये मुआवजा और 10,000 रुपये मानसिक उत्पीड़न के लिए देने का आदेश दिया।
घटना 14 दिसंबर 2021 की है, जब एक महिला अपने पति और बच्चे के साथ राजधानी एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12423) के थर्ड एसी कोच में सफर कर रही थी। पंडित दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन (मुगलसराय) पहुंचने पर उनका हैंडबैग गायब मिला, जिसमें 5,000 रुपये नकद, करीब 15 ग्राम की मंगलसूत्र और एसबीआई पासबुक थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, चोरी का पता चलते ही उन्होंने कोच अटेंडेंट को खोजा, लेकिन वह मौजूद नहीं था। इसके बाद उन्होंने आरपीएफ एस्कॉर्ट और टीटीई को सूचना दी। 16 दिसंबर 2021 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई, जिसे जीआरपी कानपुर सेंट्रल को भेजा गया, लेकिन सामान नहीं मिला।
रेलवे ने दलील दी कि स्टेशन मास्टर को चोरी की सूचना नहीं दी गई और बिना बुकिंग के सामान के लिए रेलवे जिम्मेदार नहीं है। लेकिन आयोग ने पाया कि रेलवे के अपने रिकॉर्ड में चोरी की सूचना आरपीएफ एस्कॉर्ट को दी गई थी, जो रेलवे के बयान का खंडन करती है। आयोग ने यह भी कहा कि रेलवे कोच अटेंडेंट की अनुपस्थिति का खंडन नहीं कर सका और ड्यूटी रोस्टर पेश नहीं किया।
केएस लीगल एंड एसोसिएट्स की प्रबंध भागीदार सोनम चंदवानी ने बताया कि आयोग ने रेलवे की लापरवाही, बचाव में विरोधाभास और आधिकारिक रिकॉर्ड पेश न करने के कारण रेलवे को दोषी ठहराया। आदेश के अनुसार, यदि एक माह के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज दर 12 प्रतिशत प्रति वर्ष हो जाएगी।
स्रोत: businesstoday.in



