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पेप्सिको इंडिया ने स्टिंग से 'एनर्जी' शब्द हटाया, FSSAI के निर्देश का पालन शुरू

पेप्सिको इंडिया ने FSSAI के निर्देश के बाद स्टिंग की पैकेजिंग से 'एनर्जी' शब्द हटाना शुरू कर दिया है। 1 जुलाई से 90 दिनों की अनुपालन अवधि शुरू हुई थी। कंपनी ने संशोधित पैकेजिंग का उत्पादन शुरू कर दिया है।

पेप्सिको इंडिया ने स्टिंग से 'एनर्जी' शब्द हटाया, FSSAI के निर्देश का पालन शुरू
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

कंपनी
पेप्सिको इंडिया
उत्पाद
स्टिंग
नियामक
FSSAI
अनुपालन अवधि
90 दिन, 1 जुलाई से शुरू
बाजार आकार
₹13,000 करोड़ (अनुमानित)
प्रभावित कंपनियां
रेड बुल, मॉन्स्टर, हेल, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स

पृष्ठभूमि

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 'एनर्जी ड्रिंक' को एक अलग नियामक श्रेणी के रूप में मान्यता नहीं दी है। प्राधिकरण ने ऐसे दावों पर सवाल उठाया है जिनमें कहा जाता है कि ये उत्पाद शरीर और मन को तरोताजा करते हैं, और इन्हें संभावित रूप से भ्रामक माना है।

इसी पृष्ठभूमि में, पेप्सिको इंडिया ने अपने स्टिंग कैन और बोतलों से 'एनर्जी' शब्द हटाने की प्रक्रिया शुरू की है। यह कदम FSSAI के निर्देश के अनुपालन में उठाया गया है।

वर्तमान स्थिति

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पेप्सिको इंडिया ने संशोधित पैकेजिंग का उत्पादन शुरू कर दिया है। 1 जुलाई से शुरू हुई 90 दिनों की नियामक अनुपालन अवधि के बाद, गैर-अनुपालन वाली इन्वेंट्री को खुदरा चैनलों से चरणबद्ध तरीके से हटाए जाने की उम्मीद है।

पैकेजिंग में बदलाव के कारण पेप्सिको को अपने वैश्विक विपणन संचार में भी बदलाव करना पड़ा है, जिसमें 2025 में हस्ताक्षरित फॉर्मूला वन प्रायोजन से जुड़े अभियान शामिल हैं। इस प्रायोजन के तहत स्टिंग को आधिकारिक एनर्जी ड्रिंक के रूप में प्रचारित किया गया था।

इस नियामक बदलाव के कारण अस्थायी आपूर्ति व्यवधान उत्पन्न हुआ है, क्योंकि वितरक पुरानी पैकेजिंग को लेकर हिचकिचा रहे हैं। उद्योग निकाय इंडियन बेवरेजेज एसोसिएशन (IBA) और रेड बुल, मॉन्स्टर, हेल और रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसे प्रमुख खिलाड़ियों ने विस्तार अनुरोध और FSSAI परामर्श की मांग की है।

प्रभावित कंपनियां और उनकी स्थिति
कंपनी स्थिति
पेप्सिको इंडियापैकेजिंग से 'एनर्जी' शब्द हटाना शुरू
रेड बुलविस्तार अनुरोध और FSSAI परामर्श
मॉन्स्टरविस्तार अनुरोध और FSSAI परामर्श
हेलविस्तार अनुरोध और FSSAI परामर्श
रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्सविस्तार अनुरोध और FSSAI परामर्श
स्रोत के अनुसार, ये कंपनियां विस्तार अनुरोध और FSSAI परामर्श की मांग कर रही हैं।

प्रभाव

इस बदलाव से भारत के अनुमानित ₹13,000 करोड़ के कैफीनयुक्त पेय बाजार में कारोबार करने वाली कंपनियों पर असर पड़ सकता है। पुरानी पैकेजिंग वाली इन्वेंट्री को साफ करने के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की जा रही है।

उपभोक्ताओं को बाजार में कुछ समय के लिए पुरानी और नई पैकेजिंग दोनों देखने को मिल सकती हैं। वितरकों की हिचकिचाहट के कारण कुछ उत्पादों की उपलब्धता अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि FSSAI विस्तार अनुरोधों पर सहमत नहीं होता है, तो कंपनियों को अपनी मौजूदा इन्वेंट्री को जल्दी से बाजार से हटाना पड़ सकता है, जिससे वित्तीय नुकसान हो सकता है। हालांकि, उद्योग की ओर से परामर्श की मांग से संकेत मिलता है कि नियामक के साथ बातचीत जारी रह सकती है।

यदि नियामक अनुपालन में ढील देता है, तो कंपनियों को अपनी पैकेजिंग को बदलने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है, जिससे आपूर्ति व्यवधान कम हो सकता है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि FSSAI इन अनुरोधों पर क्या निर्णय लेगा।

आने वाले महीनों में, बाजार में स्टिंग की पैकेजिंग में बदलाव देखने को मिल सकता है, और यदि अन्य कंपनियां भी इसी तरह के कदम उठाती हैं, तो पूरे कैफीनयुक्त पेय क्षेत्र में विपणन संदेशों में बदलाव आ सकता है।

स्रोत: adgully.com

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