मुख्य तथ्य
- नया स्कोरिंग सिस्टम
- 15-पॉइंट, बेस्ट-ऑफ-थ्री-गेम
- लागू होने का वर्ष
- 2027
- वर्तमान प्रारूप
- 21-पॉइंट, बेस्ट-ऑफ-थ्री-गेम
- मुख्य कोच
- पुल्लेला गोपीचंद
- खिलाड़ियों की राय
- सिक्की रेड्डी और रोहन कपूर
पृष्ठभूमि
बैडमिंटन में लगभग दो दशकों में सबसे बड़ा नियम बदलाव होने जा रहा है। बैडमिंटन विश्व महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) ने अगले साल से लंबे समय से चले आ रहे 21-पॉइंट, बेस्ट-ऑफ-थ्री-गेम प्रारूप को बदलकर 15-पॉइंट सिस्टम लागू करने की घोषणा की है।
बीडब्ल्यूएफ का कहना है कि इस बदलाव से खिलाड़ियों का कार्यभार कम होगा और खेल तेज तथा अधिक रोचक बनेगा। हालांकि, भारत के मुख्य राष्ट्रीय कोच पुल्लेला गोपीचंद का मानना है कि इसका असर कहीं अधिक गहरा होगा।
वर्तमान स्थिति
गोपीचंद ने कहा, "यह एक सामरिक बदलाव है। इससे कुछ खिलाड़ियों को फायदा होगा और कुछ खिलाड़ी पीछे छूट जाएंगे।" उन्होंने चेतावनी दी कि छोटे प्रारूप में धीमी शुरुआत के बाद वापसी की गुंजाइश बहुत कम रह जाएगी। "दिमाग का खेल अधिक होगा। पहले अंक से ही आपको पूरी तरह सजग रहना होगा।"
भारतीय खिलाड़ी एन. सिक्की रेड्डी ने भी माना कि खेल तेज और आक्रामक हो जाएगा। उन्होंने कहा, "कई खिलाड़ी मैच में तालमेल बिठाने या धीरे-धीरे रैली बनाने पर निर्भर रहते हैं। उन्हें अब उसके लिए पर्याप्त समय नहीं मिलेगा। पहले अंक से ही खिलाड़ियों को सजग रहना होगा क्योंकि वापसी की गुंजाइश बहुत कम होगी।"
| पहलू | वर्तमान प्रारूप | नया प्रारूप (2027 से) |
|---|---|---|
| अंक प्रति गेम | 21 | 15 |
| गेम की संख्या | बेस्ट ऑफ थ्री | बेस्ट ऑफ थ्री |
| गति | धीमी, रैली निर्माण की गुंजाइश | तेज, आक्रामक |
| रिकवरी का समय | अधिक | कम |
| हर रैली का मूल्य | अपेक्षाकृत कम | अधिक |
प्रभाव
रेड्डी का मानना है कि नए प्रारूप से उलटफेर अधिक होंगे। "कोई भी खिलाड़ी आक्रामक खेल दिखाकर उच्च रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वी को हरा सकता है। कम अंकों में हर रैली अधिक मूल्यवान हो जाती है, जिससे नतीजा कम अनुमानित हो जाता है।"
रेड्डी ने कम शारीरिक दबाव का स्वागत किया, लेकिन आशंका जताई कि खेल की विशेषता खत्म हो सकती है। "बैडमिंटन इसलिए रोमांचक है क्योंकि 21 अंकों में गति के बदलाव, लंबी रैलियां, वापसी और सामरिक लड़ाई होती है। 15 अंकों में यह तेज और आक्रामक मुकाबला बन सकता है।"
स्कोरिंग बदलने के बजाय रेड्डी बेहतर कार्यक्रम प्रबंधन चाहती थीं। "लंबे मैचों के बाद आराम का दिन और दोनों खिलाड़ियों को बराबर रिकवरी समय देना कार्यभार प्रबंधन का उचित तरीका होता, जबकि प्रारूप यथावत रहता।"
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
भारतीय खिलाड़ी रोहन कपूर ने कहा, "15-पॉइंट प्रारूप में हर रैली महत्वपूर्ण होगी क्योंकि गलती की गुंजाइश लगभग नहीं होगी। यह बदलाव रणनीति, शॉट चयन और निर्णय लेने पर अधिक जोर देगा, न कि केवल शारीरिक सहनशक्ति पर।"
कपूर ने यह भी कहा कि यह बदलाव कुछ खिलाड़ियों के पक्ष में होगा और मैच अधिक अनिश्चित होंगे, लेकिन वे इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं हैं कि यह खिलाड़ियों को 'खत्म' कर देगा। "यह उन अनुभवी खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो लंबे मैचों की शारीरिक मांगों से जूझ रहे हैं और स्मार्ट, सामरिक बैडमिंटन को बढ़ावा देकर उनके करियर को बढ़ा सकता है।"
यदि नया प्रारूप लागू होता है, तो मैच की अवधि घटने की संभावना है, जिससे टूर्नामेंट अधिक टेलीविजन-अनुकूल हो सकते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इससे खिलाड़ियों की चोटों में कमी आएगी या खेल की लोकप्रियता पर क्या असर पड़ेगा।
स्रोत: deccanchronicle.com



