स्क्वायर यार्ड्स की सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रस्तावित लगभग 9,030 मेगावाट क्षमता वाली डेटा सेंटर परियोजनाएं वर्ष 2030 तक लगभग 4.33 लाख प्रत्यक्ष और परोक्ष नौकरियां पैदा कर सकती हैं। साथ ही, आवासीय क्षेत्र में लगभग 19.5 करोड़ वर्गफुट की अतिरिक्त मांग उत्पन्न होने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत वैश्विक डिजिटल डेटा का लगभग 20 प्रतिशत उत्पादन करता है, जबकि वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में उसकी हिस्सेदारी केवल 4 प्रतिशत है। यह अंतर डेटा सेंटर अवसंरचना के विस्तार की संभावनाओं को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और एंटरप्राइज डिजिटाइजेशन में तेजी से डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश बढ़ रहा है। इससे स्थापित क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जो अवसंरचना-आधारित रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा देगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े डेटा सेंटर परिसरों के आसपास 5 से 15 किलोमीटर का क्षेत्र सबसे अधिक लाभान्वित होगा, जिसे 'गोल्डन रिंग' नाम दिया गया है। इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली और संचार सुविधाओं के सुधार के साथ मिश्रित उपयोग वाली परियोजनाओं, आवासीय टाउनशिप, खुदरा बाजार और सामाजिक सुविधाओं के विकास की संभावना है।
राज्यों में महाराष्ट्र में सबसे अधिक 5.4 करोड़ वर्गफुट आवासीय मांग उत्पन्न होने का अनुमान है। इसके बाद कर्नाटक में लगभग 2.8 करोड़ वर्गफुट, आंध्र प्रदेश में 2.3 करोड़ वर्गफुट से अधिक, उत्तर प्रदेश में लगभग 2.27 करोड़ वर्गफुट, तेलंगाना में 2.16 करोड़ वर्गफुट और तमिलनाडु में लगभग 1.94 करोड़ वर्गफुट आवासीय मांग का अनुमान है।
स्रोत: डीडी न्यूज़, प्रसार भारती



