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डीपफेक का बढ़ता खतरा: एआई-आधारित आसान उपकरणों से निर्माण में तेजी

एआई-आधारित आसान उपकरणों से डीपफेक का बड़े पैमाने पर निर्माण हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव जैसी सामाजिक प्रक्रियाओं में यह मुख्य जोखिम बन सकता है। पता लगाने के उपकरण अभी भी सीमित हैं, जबकि ऑडियो हेरफेर का पता नहीं चल पाता।

मुख्य तथ्य

डीपफेक की परिभाषा
एआई-आधारित झूठी दृश्य सामग्री जिसमें वास्तविक व्यक्ति को कुछ ऐसा कहते या करते दिखाया जाता है जो उन्होंने कभी नहीं किया।
हालिया उदाहरण
अल्बानियाई टीवी प्रस्तोता लुआना वोजोल्का का कामुक वीडियो, ब्लेंडी फ़ेवज़िउ का बहुभाषी वीडियो, ईलोन मस्क का अल्बानियाई/सर्बियाई वीडियो (2022)।
बेला हदीद डीपफेक
एक्स पर 28 मिलियन से अधिक बार देखा गया।
पता लगाने के उपकरण
फेककैचर और सेंटिनल, लेकिन कोई खुला मुफ्त उपकरण नहीं।
ऑडियो हेरफेर
वर्तमान प्लेटफ़ॉर्म ऑडियो जोड़-तोड़ का पता नहीं लगाते।

पृष्ठभूमि

लगभग छह साल पहले पत्रकारिता के लिए एक नए 'वायरस' के रूप में चर्चित डीपफेक के खिलाफ आज भी कोई 'एंटी-वायरस' नहीं है। इनका निर्माण अब काफी उन्नत और परिपूर्ण हो गया है, और एक अंतिम चरण के बाद इन फर्जी वीडियो की उत्पादन प्रक्रिया और सरल हो जाएगी।

पहले डीपफेक तैयार करने के लिए विशिष्ट प्रोग्राम का उपयोग करने में कुछ कौशल की आवश्यकता होती थी, लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित उपयोग में आसान नए अनुप्रयोगों के विकास से अब डीपफेक का बड़े पैमाने पर निर्माण हो रहा है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में पिछले राष्ट्रपति चुनाव में 'डीपफेक' की तुलना में 'चीपफेक' अधिक प्रचलित थे, क्योंकि सस्ते फेक का निर्माण आसानी से कोई भी कर सकता था। अब जब डीपफेक के लिए भी यह संभव हो रहा है, तो चुनाव जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक प्रक्रियाओं में सूचना की दुनिया में डीपफेक मुख्य जोखिम होगा, क्योंकि तकनीकी अर्थों में हेरफेर अधिक संभव होता जा रहा है।

वर्तमान स्थिति

डीपफेक कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित झूठी दृश्य सामग्री है, जिसमें एक वास्तविक व्यक्ति को कुछ ऐसा कहते या करते हुए प्रस्तुत किया जाता है जो उन्होंने कभी नहीं किया या कहा। मनोरंजन और जागरूकता के लिए कई डीपफेक बनाए गए हैं, लेकिन कुछ मामलों में समाज में हेरफेर का उद्देश्य राजनीतिक या आर्थिक भी रहा है।

बाल्कन क्षेत्र में हालिया उदाहरण अल्बानियाई टीवी प्रस्तोता लुआना वोजोल्का का प्रतिरूपण करने वाला कामुक वीडियो है, जिसमें एआई के उपयोग से उसका चेहरा एक अलग शरीर से जोड़ा गया। अल्बानियाई पत्रकार ब्लेंडी फ़ेवज़िउ ने जागरूकता के लिए अपना डीपफेक वीडियो प्रकाशित किया, जिसमें वह चीनी, अरबी, रूसी और पुर्तगाली बोलते दिखते हैं। 2022 में इस क्षेत्र में ईलोन मस्क के अल्बानियाई या सर्बियाई बोलने का वीडियो भी प्रकाशित हुआ था।

वैश्विक स्तर पर, प्रसिद्ध अमेरिकी मॉडल बेला हदीद का एक वायरल डीपफेक सामने आया, जिसमें वह हमास के खिलाफ युद्ध में इज़राइल के कार्यों का समर्थन करती दिखीं, जो उन्होंने कभी नहीं कहा। इस डीपफेक को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर 28 मिलियन से अधिक बार देखा गया।

डीपफेक के उदाहरण और उनके प्रसार
उदाहरण विवरण देखे जाने की संख्या
बेला हदीदइज़राइल समर्थन का झूठा वीडियो28 मिलियन से अधिक
स्रोत में केवल बेला हदीद के डीपफेक के लिए दर्शक संख्या दी गई है।

प्रभाव

एआई-आधारित प्रौद्योगिकी और आसान कार्यक्रमों के विकास से सच्चाई के लिए खतरा बढ़ गया है। डीपफेक के प्रसार के साथ यह समझना और कठिन हो जाएगा कि सच्चाई क्या है। मीडिया की विश्वसनीयता के संकट को देखते हुए निकट भविष्य में पत्रकारिता के लिए और अधिक चुनौती होगी।

इस स्थिति से निपटने के लिए पेशेवर पत्रकारिता सबसे अच्छा माध्यम है, जो पेशेवर मानकों का पालन करती है और सार्वजनिक हित को पहले रखती है। अन्यथा, सनसनीखेज और क्लिक-बैटिंग पत्रकारिता मीडिया के प्रति अविश्वास बढ़ाएगी और नागरिकों को असुरक्षित महसूस कराएगी, जिससे सूचना वातावरण में अन्य अभिनेताओं के लिए जगह बनेगी।

डीपफेक का पता लगाने के लिए वर्तमान में कुछ प्रोग्राम हैं, जैसे फेककैचर और सेंटिनल, लेकिन कोई खुला उपकरण सभी के लिए मुफ्त उपलब्ध नहीं है। ये प्लेटफ़ॉर्म ऑडियो जोड़-तोड़ का पता नहीं लगाते, जो दृश्य-श्रव्य हेरफेर में महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ मामलों में छवि वास्तविक होती है जबकि ध्वनि एआई द्वारा उत्पन्न होती है।

भविष्य की संभावनाएँ

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि डीपफेक के निर्माण की सुविधा प्रदान करने वाली तकनीक तीव्र गति से विकसित होती रही, तो सत्यापन पद्धति को और सरल और तेज़ बनाने की आवश्यकता होगी। पता लगाने के तरीकों को भी डीपफेक की प्रगति के साथ उन्नत करना होगा।

डीपफेक के बारे में जागरूकता बढ़ाने से समाज किसी भी वीडियो के प्रति अधिक आलोचनात्मक हो सकता है। दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए व्यक्तियों और नागरिक समाज संगठनों की ओर से बड़ी प्रतिबद्धता की आवश्यकता होगी।

हालांकि, डीपफेक के लिए नया कानूनी ढांचा आवश्यक नहीं है, क्योंकि पहले से ही ऐसे कानून हैं जो व्यक्तियों, व्यवसायों या समाज की रक्षा करते हैं। यदि पेशेवर पत्रकारिता और सत्यापन उपकरणों का विकास साथ-साथ चले, तो डीपफेक के जोखिम को कम किया जा सकता है; अन्यथा, सूचना वातावरण में हेरफेर के माध्यम से समाज को नुकसान पहुंचाने वालों को लाभ हो सकता है।

स्रोत: Debashish Chakrabarty / Global Voices हिंदी

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