सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने महिला स्वामित्व वाले उद्यमों को ZED (Zero Defect, Zero Effect) सर्टिफिकेशन पर 100 प्रतिशत सब्सिडी देने की सुविधा 11 नवंबर 2023 से लागू की है। इससे महिला उद्यमियों के लिए प्रमाणन की लागत पूरी तरह समाप्त हो गई है।
ZED योजना का उद्देश्य उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने और पर्यावरण पर प्रभाव कम करने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत MSMEs को ब्रॉन्ज, सिल्वर और गोल्ड श्रेणियों में प्रमाणन दिया जाता है। पात्र इकाइयों को परीक्षण, सिस्टम और उत्पाद प्रमाणन पर 75 प्रतिशत तक (अधिकतम 50,000 रुपये), हैंडहोल्डिंग के लिए 2 लाख रुपये तक और प्रदूषण नियंत्रण के लिए 3 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है।
सरकार के अनुसार, 7 जुलाई 2026 तक लगभग 9.49 लाख MSMEs इस योजना के तहत पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 6.67 लाख से अधिक ब्रॉन्ज, 6,700 सिल्वर और 4,800 गोल्ड सर्टिफिकेशन जारी किए गए हैं। अब तक 913 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है।
योजना का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी औद्योगिक नीतियों में ZED को शामिल किया है, जबकि 19 वित्तीय संस्थान प्रमाणित इकाइयों को प्रोसेसिंग शुल्क और ब्याज दरों में रियायत दे रहे हैं।
मंत्रालय ने दो सफलता की कहानियां साझा की हैं। नासिक की फाइनेक्स इंडस्ट्रीज ने ZED सिल्वर प्रमाणन के बाद गुणवत्ता लागत में 11 प्रतिशत और रीवर्क में 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की। जालंधर की कॉन्सेप्ट क्लोदिंग ने कार्यस्थल दुर्घटनाओं में 80 प्रतिशत और रीवर्क में 7.4 प्रतिशत की कमी हासिल की।
स्रोत: डीडी न्यूज़, प्रसार भारती



