मुख्य तथ्य
- तारीख
- मंगलवार, 4 अगस्त 2026
- स्थगन
- बुधवार सुबह 11 बजे तक
- विपक्ष की मांग
- गृह मंत्री अमित शाह का बयान
- मुद्दे
- नीट पेपर लीक, जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई
- सोमवार को पारित बिल
- सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026
पृष्ठभूमि
संसद का मॉनसून सत्र शुरू से ही हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। विपक्षी दल नीट पेपर लीक के मुद्दे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर लगातार सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की गई, इस पर गृह मंत्री को सदन में बयान देना चाहिए। इसी मांग को लेकर सोमवार को भी सदन की कार्यवाही बाधित रही थी।
वर्तमान स्थिति
मंगलवार सुबह 11 बजे सदन की बैठक शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। उनकी मांग थी कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित हों और जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शनकारियों पर की गई पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाब दें।
स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों से अपनी सीटों पर बैठने और प्रश्नकाल को शांतिपूर्वक चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह एक 'महत्वपूर्ण' समय है और नारेबाजी से जरूरी मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाएगी, लेकिन विपक्ष का शोर कम नहीं हुआ।
इसके बाद सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 2 बजे तक और फिर बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
| दिनांक | घटना |
|---|---|
| 20 जुलाई | जंतर-मंतर पर प्रदर्शन |
| सोमवार | सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 ध्वनि मत से पारित |
| मंगलवार | कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक स्थगित |
प्रभाव
सोमवार को विपक्ष के शोर-शराबे के बीच ही 'सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026' ध्वनि मत से लोकसभा में पारित कर दिया गया। यह बिल सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा है।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने विपक्ष की नारेबाजी के बीच ही सदन में बिल पेश किया। कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने बार-बार सदस्यों से शांति बनाए रखने और सदन चलने देने की अपील की, लेकिन विरोध जारी रहा। इसके बावजूद बिल को मंजूरी मिल गई।
लगातार हंगामे के कारण संसदीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में देरी हो सकती है।
आगे की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहता है और गृह मंत्री सदन में बयान नहीं देते हैं, तो आगामी दिनों में भी सदन की कार्यवाही बाधित हो सकती है।
स्पीकर और सरकार की ओर से विपक्ष के साथ बातचीत से समाधान निकलने की संभावना है, जिससे सदन सुचारू रूप से चल सके।
यदि हंगामा जारी रहता है, तो मॉनसून सत्र के शेष कार्यों को पूरा करने के लिए सत्र को बढ़ाना पड़ सकता है या कुछ विधेयकों को जल्दबाजी में पारित करना पड़ सकता है।
स्रोत: डीडी न्यूज़, प्रसार भारती



