कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के अधीन प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) देशभर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के नेटवर्क के माध्यम से शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के तहत राष्ट्रीय कौशल अर्हता कार्यढांचा (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप 170 पाठ्यक्रमों में व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करता है। कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
डीजीटी के अनुसार आईटीआई के माध्यम से संचालित सभी पाठ्यक्रम एनएसक्यूएफ के अनुरूप हैं और राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) से अनुमोदित हैं। तकनीकी प्रगति, व्यावसायिक मानकों में बदलाव और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यचर्याओं का पुनरीक्षण आवश्यकता के आधार पर अथवा एनसीवीईटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष में किया जाता है। वर्तमान में सीटीएस के 40 पाठ्यचर्याओं का पुनरीक्षण पूरा किया जा चुका है।
पाठ्यक्रमों में उद्योग 4.0 के अनुप्रयोगों, कृत्रिम मेधा (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), स्वचालन, हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल कौशल, उद्यमशीलता, कार्यस्थल सुरक्षा, पर्यावरणीय टिकाऊपन और परिणाम आधारित शिक्षण जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जा रहा है। डीजीटी ने भविष्य की उद्योग आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कृत्रिम मेधा, मेकाट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, औद्योगिक रोबोटिक्स, उन्नत विनिर्माण, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, इलेक्ट्रॉनिकी, सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में 32 नव युगीन एवं आधुनिक कौशल पाठ्यक्रम तैयार किए हैं।
महिला अभ्यर्थी निर्धारित प्रवेश अर्हताओं के आधार पर सीटीएस के तहत सभी एनएसक्यूएफ-अनुरूप पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकती हैं। भारत सरकार ने सभी राजकीय और निजी आईटीआई में सभी पाठ्यक्रमों के तहत महिला अभ्यर्थियों के लिए 30% सीटों का आरक्षण मंजूर किया है। इन सीटों को संबंधित राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र सरकारों की सामान्य आरक्षण नीति के अनुसार भरा जा सकता है।
नए पाठ्यक्रम शुरू करने और मौजूदा पाठ्यक्रमों के पुनरीक्षण के लिए श्रम बाजार की मांग का आकलन कौशल अंतराल अध्ययनों तथा उद्योगों, सेक्टर कौशल परिषदों, जिला कौशल समितियों, नियोजकों, उद्योग संघों, राज्य सरकारों, प्रशिक्षण संस्थानों और विषय विशेषज्ञों के साथ लगातार परामर्श के जरिए किया जाता है। सरकार की यह परामर्श आधारित व्यवस्था यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि आईटीआई पाठ्यक्रम उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बने रहें।
स्रोत: डीडी न्यूज़, प्रसार भारती



