मुख्य तथ्य
- वापस लाए गए भगोड़े
- 274
- देशों की संख्या
- 36
- अवधि
- 2019 से अब तक
- जब्त संपत्ति (PMLA)
- ₹17,874 करोड़
- सफल वापसी (रिस्टिट्यूशन)
- ₹18,762 करोड़
- रेड कॉर्नर नोटिस (2026 में अब तक)
- 182
पृष्ठभूमि
गृह मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि वर्ष 2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। वापस लाए गए भगोड़ों में आतंकी, गैंगस्टर, वित्तीय अपराधी, नार्कोटिक्स आरोपी, हत्या, बलात्कार और पॉक्सो मामलों के वांछित शामिल हैं।
मंत्रालय के अनुसार, यह अभियान आतंकवाद, प्रो-खालिस्तान उग्रवाद, गैंगस्टर-आतंकवाद, नार्कोटिक्स, साइबर धोखाधड़ी और फर्जी मुद्रा तक फैला है। तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण भारत के संकल्प और जटिल आतंकवाद मामलों में कानूनी-राजनयिक प्रयासों का उदाहरण बताया गया है।
2014 से पहले प्रत्यर्पण कानून पुराने हो चुके थे और केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियाँ थीं। आर्थिक भगोड़ों को पकड़ने और उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए कोई अलग कानून नहीं था। 2004 से 2013 के बीच औसतन प्रति वर्ष केवल 4 भगोड़ों का प्रत्यर्पण होता था, जबकि 110 अनुरोध लंबित थे।
वर्तमान स्थिति
गृह मंत्रालय ने बताया कि भगोड़ों को वापस लाने का अभियान आतंकवाद, प्रो-खालिस्तान उग्रवाद, गैंगस्टर-आतंकवाद, नार्कोटिक्स, साइबर धोखाधड़ी और फर्जी मुद्रा तक फैला है। जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में विदेशों में बैठे भगोड़ों का उपयोग आतंक, नार्को-आतंक और सीमा पार समर्थन नेटवर्क चलाने में हो रहा था।
सरकार ने 2019 में NIA संशोधन अधिनियम और UAPA संशोधन अधिनियम लागू किए और 2020 के बाद भगोड़ों को वापस लाने की प्रक्रिया को 'मिशन मोड' में आगे बढ़ाया। 2024 में तीन नए आपराधिक कानून लागू किए गए, जिनमें BNSS की धारा 355 और 356 में 'ट्रायल इन एब्सेंशिया' का प्रावधान किया गया।
जनवरी 2026 में IB के मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के तहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन किया गया। यह समूह भगोड़ों की प्राथमिकता, डॉसियर मानकीकरण, सूचना अंतराल को दूर करने, विदेशी साझेदारों से अनुवर्ती और राज्य मामलों को राष्ट्रीय समर्थन देने का कार्य करता है।
| वर्ष | नोटिसों की संख्या |
|---|---|
| 2022 | 40 |
| 2023 | 100 |
| 2024 | 107 |
| 2025 | 112 |
| 2026 (अब तक) | 182 |
प्रभाव
सरकार के अनुसार, भगोड़ों को वापस लाने से पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलने की संभावना है। 'व्होल ऑफ गवर्नमेंट' दृष्टिकोण के तहत केंद्र और राज्य एजेंसियाँ मिलकर काम कर रही हैं, जिससे कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिली है।
PMLA के सख्त प्रवर्तन से 2019 से 2026 तक भगोड़ों की कुल ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई। इसी अवधि में ₹18,762 करोड़ की सफल वापसी (रिस्टिट्यूशन) की गई, जिसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों का पैसा शामिल है।
CBI ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़ों को पकड़ने के लिए ग्लोबल ऑपरेशन्स सेंटर स्थापित किया है। यह केंद्र इंटरपोल के माध्यम से दुनिया भर की पुलिस से रियल-टाइम समन्वय करता है। हर राज्य और केंद्रीय जांच एजेंसी में इंटरपोल संपर्क अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि सरकार भगोड़ों के खिलाफ अपना वर्तमान रुख जारी रखती है, तो आने वाले वर्षों में प्रत्यर्पण की संख्या में और वृद्धि हो सकती है। इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है, जो भविष्य में और अधिक भगोड़ों की वापसी का संकेत दे सकती है।
हालांकि, प्रत्यर्पण की सफलता विदेशी साझेदारों के सहयोग और कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलता पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय सहयोग बना रहता है, तो भगोड़ों की वापसी में तेजी आ सकती है, लेकिन अगर कानूनी बाधाएँ आती हैं, तो प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।
सरकार द्वारा 'ट्रायल इन एब्सेंशिया' जैसे प्रावधानों से भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आने की संभावना है। फिर भी, यह स्पष्ट नहीं है कि ये उपाय कितने प्रभावी होंगे, क्योंकि विदेशी अदालतों का रुख भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्रोत: डीडी न्यूज़, प्रसार भारती
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वर्षवार रेड कॉर्नर नोटिस
2026 (अब तक)182
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| श्रेणी | नोटिसों की संख्या |
|---|---|
| 2022 | 40 |
| 2023 | 100 |
| 2024 | 107 |
| 2025 | 112 |
| 2026 (अब तक) | 182 |
स्रोत:डीडी न्यूज़, प्रसार भारती स्रोत-समर्थित



