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भारतीय कुश्ती में असमान संघर्ष: बृजभूषण की बरी होने के बाद सवाल

दिल्ली की अदालत ने पूर्व WFI प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में बरी कर दिया। महिला पहलवानों ने अपील का संकेत दिया है। यह फैसला खेलों में महिलाओं के मनोबल और खेल संघों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

भारतीय कुश्ती में असमान संघर्ष: बृजभूषण की बरी होने के बाद सवाल
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

मामला
दिल्ली की अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किया
आरोप
महिला पहलवानों द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप
POCSO मामला
नाबालिग पहलवान द्वारा आरोप वापस लेने के बाद समाप्त
अपील
महिला पहलवानों ने अपील करने का संकेत दिया
ICC की कमी
2023 में 30 में से 16 राष्ट्रीय खेल महासंघों में ICC नहीं थी
विरोध प्रदर्शन
2023 में जंतर-मंतर पर पहलवानों का विरोध

पृष्ठभूमि

दिल्ली की एक अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया। यह फैसला उन आरोपों के संदर्भ में आया है, जिन्होंने 2023 में जंतर-मंतर पर पहलवानों के विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया था।

शुरुआत से ही पहलवानों को न केवल सिंह बल्कि पूरी व्यवस्था से लड़ना पड़ रहा था। प्रारंभिक प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप आवश्यक था। बाद में, एक नाबालिग पहलवान ने सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोप वापस ले लिए, जिससे POCSO अधिनियम के तहत मामला समाप्त हो गया और सिंह जेल जाने से बच गए।

वर्तमान स्थिति

अन्य मामले की सुनवाई स्थगन और देरी से प्रभावित रही, और अंततः अदालत ने फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे आरोपों को साबित नहीं कर सका। महिला पहलवानों ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने का संकेत दिया है।

इस बीच, WFI ने कथित तौर पर शिकायत करने वालों के लिए जीवन कठिन बना दिया है। 2023 में, 30 राष्ट्रीय खेल महासंघों में से 16 के पास आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का अभाव था। पहलवानों के विरोध ने कुछ महासंघों को अपनी संरचना में बदलाव करने के लिए मजबूर किया, लेकिन वे अभी भी कुछ लोगों द्वारा नियंत्रित अपारदर्शी निकाय बने हुए हैं।

राष्ट्रीय खेल महासंघों में ICC की स्थिति (2023)
विवरण संख्या
कुल महासंघ30
ICC वाले महासंघ14
ICC रहित महासंघ16
आंकड़े स्रोत से लिए गए हैं।

प्रभाव

यह फैसला देश भर में कुश्ती और अन्य खेलों में महिलाओं के मनोबल पर गहरा असर डाल सकता है। कई खेल संघ अभी भी धन, बल और राजनीतिक प्रभाव के दम पर चलाए जाते हैं, जिससे महिला एथलीटों के लिए न्याय पाना कठिन हो जाता है।

इस घटना से यह संदेश जाता है कि खेल का मैदान हमेशा निष्पक्ष नहीं होता। हालांकि कुश्ती नियमों के अनुसार खेली जाती है, लेकिन इस मामले के तरीके ने निष्पक्षता की धारणा को चुनौती दी है।

भविष्य की संभावनाएँ

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि महिला पहलवान अपील करती हैं और उच्च न्यायालय में मामला आगे बढ़ता है, तो न्यायिक प्रक्रिया में नई बहस हो सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अपील पर कब सुनवाई होगी और क्या परिणाम आएगा।

यदि खेल महासंघों में सुधार नहीं होते हैं, तो इसी तरह की घटनाएँ दोबारा हो सकती हैं, जिससे महिला एथलीटों का विश्वास और कम हो सकता है। दूसरी ओर, यदि सरकार और खेल निकाय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाते हैं, तो भविष्य में खेलों में महिलाओं की स्थिति में सुधार हो सकता है।

स्रोत: hindustantimes.com

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तुलना

राष्ट्रीय खेल महासंघों में ICC की स्थिति (2023)

संख्या
3022.5157.50301416कुल महासंघकुल महासंघICC वाले महासंघICC वाले महासंघICC रहित महासंघICC रहित महासंघ
कुल महासंघ30
ICC वाले महासंघ14
ICC रहित महासंघ16

ICC रहित महासंघ16

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श्रेणीसंख्या
कुल महासंघ30
ICC वाले महासंघ14
ICC रहित महासंघ16

स्रोत:hindustantimes.com स्रोत-समर्थित

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