मुख्य तथ्य
- आयु
- 26 वर्ष
- हालिया प्रतियोगिता
- 2026 आईएसएसएफ विश्व कप, हांगझोउ
- ओलंपिक प्रतिनिधित्व
- टोक्यो 2020
- चोटें
- 2017 में घुटने की समस्या; 2022 में पीठ में डिस्क बुल्ज
- प्रशिक्षण केंद्र
- गन फॉर ग्लोरी अकादमी
- कोच और मेंटर
- कोच नेहा चव्हाण; मेंटर गगन नारंग
पृष्ठभूमि
नई दिल्ली, 4 अगस्त: भारत की पूर्व विश्व नंबर एक निशानेबाज एलावेनिल वालारिवन ने अपने करियर के उतार-चढ़ाव पर प्रकाश डाला है। 26 वर्षीय एलावेनिल ने हाल ही में 2026 आईएसएसएफ विश्व कप, हांगझोउ में भाग लिया था। उन्होंने बताया कि कैसे संयोग से निशानेबाजी शुरू हुई और धीरे-धीरे यह उनका पेशा बन गई।
एलावेनिल ने टोक्यो 2020 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाजों में शामिल हैं। उनके करियर में आईएसएसएफ विश्व कप, आईएसएसएफ विश्व कप फाइनल, आईएसएसएफ जूनियर विश्व कप और कई एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक शामिल हैं।
वर्तमान स्थिति
एलावेनिल ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि 2017 में घुटने की गंभीर समस्या के कारण वह पांच शॉट भी खड़े होकर नहीं लगा पाती थीं। 2022 में उन्हें पीठ में चोट लगी, जिसमें सर्वाइकल और लंबर स्पाइन में डिस्क बुल्ज थे। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षण आए जब उन्हें लगा कि शायद वह खेल जारी नहीं रख पाएंगी।
इस चुनौतीपूर्ण दौर से उबरने के बारे में उन्होंने कहा, "जिस चीज़ ने मेरी मदद की, वह था हर दिन अभ्यास करना। भले ही मैं पुनर्वास से पहले केवल एक घंटा ही प्रशिक्षण ले पाती, लेकिन मैं खेल से जुड़ी रहना चाहती थी।" उन्होंने कहा कि निशानेबाजी के प्रति उनका प्यार ही उन्हें इस मुश्किल दौर में आगे बढ़ाता रहा।
| प्रतियोगिता | पदक |
|---|---|
| आईएसएसएफ विश्व कप | स्वर्ण |
| आईएसएसएफ विश्व कप फाइनल | स्वर्ण |
| आईएसएसएफ जूनियर विश्व कप | स्वर्ण |
| एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप | कई स्वर्ण |
प्रभाव
एलावेनिल ने समाज में महिला निशानेबाजों को लेकर बनी रूढ़ियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनसे पूछा जाता था, "लड़की हाथ में बंदूक लेकर क्यों घूम रही है?" लेकिन उनके लिए मायने रखता था उनके माता-पिता का दृष्टिकोण और खुद पर उनका विश्वास। उन्होंने कहा कि आलोचना हमेशा होती रहेगी, लेकिन उन्होंने उसे अपनी यात्रा को परिभाषित नहीं करने दिया।
अपने करियर में गगन नारंग स्पोर्ट्स प्रमोशन फाउंडेशन और गन फॉर ग्लोरी अकादमी के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 2014 में गुजरात सरकार की एक पहल के तहत वह इस अकादमी से जुड़ीं। तब से वह अपनी कोच नेहा चव्हाण के साथ काम कर रही हैं, जबकि गगन नारंग उनके निरंतर मार्गदर्शक रहे हैं।
आगे की राह
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
आगामी एशियाई खेलों की तैयारियों के बारे में एलावेनिल ने कहा कि वह बहुत आगे नहीं सोच रही हैं। उन्होंने कहा, "मेरी कोच और मैं अपने खेल के हर छोटे पहलू को सुधारने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारे पास सीज़न के लिए योजनाएं हैं, लेकिन प्राथमिकता हर दिन बेहतर होना है।"
यदि वह अपनी वर्तमान प्रशिक्षण व्यवस्था और मानसिकता को बनाए रखती हैं, तो आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके अच्छे प्रदर्शन की संभावना है। हालांकि, यह देखना होगा कि उनकी चोटें पूरी तरह से ठीक हैं या नहीं और वह प्रतिस्पर्धी स्तर पर कितना समय दे पाती हैं। अगर वह स्वस्थ रहती हैं, तो वह भारत के लिए पदक जीत सकती हैं, लेकिन अगर चोटें फिर से उभरती हैं, तो उन्हें और संघर्ष करना पड़ सकता है।
स्रोत: prokerala.com



