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भारतीय अदालतों में AI उपकरणों का बढ़ता उपयोग: न्याय में तेजी या नए जोखिम?

भारत में लाखों मामले लंबित हैं। AI उपकरण जैसे SUPACE, SUVAS और Adalat.AI अदालतों में पेश किए जा रहे हैं, लेकिन ChatGPT से जुड़े मामलों में चेतावनी भी मिली है।

मुख्य तथ्य

लंबित मामले
कई करोड़
ई-कोर्ट परियोजना
तीसरा चरण लागू
SUPACE
AI-आधारित प्लेटफॉर्म, फैसले नहीं लेता
SUVAS
अनुवाद सॉफ्टवेयर, अंग्रेजी से भारतीय भाषाओं में
Adalat.AI
केरल हाई कोर्ट द्वारा अनिवार्य, 1 नवंबर 2025 से
दिल्ली हाई कोर्ट की चेतावनी
ChatGPT तर्कों पर विचार करने से इनकार

पृष्ठभूमि

भारत में न्यायपालिका पर लंबित मामलों का भारी बोझ है, जिसकी संख्या कई करोड़ तक पहुंच गई है। इस समस्या से निपटने के लिए, सरकार, सर्वोच्च न्यायालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय के निर्देश पर ई-कोर्ट परियोजना का तीसरा चरण लागू किया जा रहा है। इस चरण का उद्देश्य मशीन लर्निंग और भाषा प्रौद्योगिकी के साथ फाइलिंग, केस प्रबंधन और कार्यप्रवाह प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना है।

ई-कोर्ट परियोजना की शुरुआत 2007 में हुई थी, जिसके तहत ई-फाइलिंग, डिजिटल कॉज़ सूची और ऑनलाइन फैसलों की सुविधा शुरू की गई। अब तीसरे चरण में न्यायिक जानकारी को डिजिटाइज़ करके नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और मशीन लर्निंग के माध्यम से विश्लेषण किया जा रहा है। बजट का एक बड़ा हिस्सा AI और ब्लॉकचेन जैसी भविष्य की तकनीकों के लिए आरक्षित किया गया है।

वर्तमान स्थिति

सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान पीठ की सुनवाई की रियल-टाइम ट्रांसक्रिप्ट बनाने के लिए AI का उपयोग शुरू किया है। वर्ष 2023 से यह रिकॉर्ड के लिए खोजे जा सकने योग्य टेक्स्ट तैयार कर रहा है। इसके अलावा, 'सुप्रीम कोर्ट पोर्टल फॉर असिस्टेंस इन कोर्ट्स एफिशिएंसी' (SUPACE) नामक AI-आधारित प्लेटफॉर्म न्यायाधीशों को विशाल केस अभिलेखों को संभालने में मदद करता है, जो तथ्यों की पहचान करता है और मिसालें सुझाता है, लेकिन फैसला नहीं लेता।

भाषा की पहुंच के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने 'विधिक अनुवाद सॉफ्टवेयर' (SUVAS) विकसित किया है, जो फैसलों का अंग्रेजी से अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद करता है। केरल हाई कोर्ट ने 2025 में निर्देश दिया कि सभी निचली अदालतें 1 नवंबर, 2025 से गवाहों के बयान रिकॉर्ड करने के लिए AI-सक्षम स्पीच-टू-टेक्स्ट टूल Adalat.AI का उपयोग करें। यह उपकरण हार्वर्ड और MIT जैसे विश्वविद्यालयों के शोध से जुड़े एक स्टार्टअप द्वारा बनाया गया है।

AI उपकरण और उनके उपयोग
उपकरण विकासकर्ता उपयोग
SUPACEसर्वोच्च न्यायालयकेस अभिलेख प्रबंधन
SUVASसर्वोच्च न्यायालयअनुवाद
Adalat.AIस्टार्टअप (हार्वर्ड/MIT शोध)गवाहों के बयान रिकॉर्डिंग
स्रोत डेटा से सीधे लिया गया।

प्रभाव

AI उपकरणों के उपयोग से सुनवाई की अवधि कम हो सकती है, प्रतिलेखन और अनुवाद की सटीकता में सुधार हो सकता है, और वादियों, विशेषकर दूरदराज के जिलों में, को अपने मामलों की प्रगति के बारे में बेहतर जानकारी मिल सकती है। नीति दस्तावेजों में मानवीय गलतियों को कम करने और न्यायाधीशों को महत्वपूर्ण मामलों को प्राथमिकता देने में AI की क्षमता पर जोर दिया गया है।

हालांकि, 2023 में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ट्रेडमार्क मामले में ChatGPT पर आधारित तर्कों पर विचार करने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) केस के हवाले और तथ्यों को मनगढ़ंत बना सकते हैं। एक अन्य मामले में, घर खरीदारों को याचिका वापस लेने की अनुमति दी गई जब पता चला कि उनकी दलीलों के कुछ हिस्से ChatGPT द्वारा बनाए गए थे, जिनमें झूठे मामले और काल्पनिक बयान पाए गए।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि AI उपकरणों को सावधानी से लागू किया जाता है, तो वे न्यायिक प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं और पारदर्शिता बढ़ा सकते हैं। हालांकि, यदि इनके आउटपुट की स्वतंत्र सत्यापन की व्यवस्था नहीं की गई, तो ये न्यायालय को गुमराह कर सकते हैं। न्यायालयों द्वारा AI को बेतरतीबी से अपनाने के कारण जवाबदेही, निजता और स्वचालन की सीमाओं के लिए नियम तय करना आवश्यक हो गया है।

आगे देखते हुए, यदि नियामक ढांचा मजबूत होता है और AI उपकरणों का उपयोग केवल सहायक के रूप में किया जाता है, तो यह न्यायपालिका की दक्षता में सुधार कर सकता है। लेकिन यदि इन उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता बढ़ती है, तो निष्पक्षता और मानवीय विवेक पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इन चिंताओं का समाधान कैसे किया जाएगा।

स्रोत: Debashish Chakrabarty / Global Voices हिंदी

AMRIT EXPLAINER

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स्रोत-समर्थित
समयरेखा

AI अपनाने की समयरेखा

  1. 01

    ई-कोर्ट परियोजना शुरू

    ई-फाइलिंग, डिजिटल कॉज़ सूची और ऑनलाइन फैसले शुरू हुए।

  2. 02

    सुप्रीम कोर्ट में स्वचालित ट्रांसक्रिप्शन

    संवैधानिक मामलों में रियल-टाइम ट्रांसक्रिप्ट बनने लगे।

स्रोत:स्रोत: Global Voices हिंदी स्रोत-समर्थित

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